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न दिमाग कम था,  न मेहनत कम की।  फिर क्यों न पढ़ पाई,  अम्मा तेरी बिटिया?  जब हमारा समाज ही पुरुष प्रधान हो, जहाँ स्त्री का अपमान हो, उसके सपने का गला घोंटा जाता हो।  उस समाज में कैसे लड़की तरक्की कर सकती है?  संसार में...      एक ओर लड़कियां चांद पर जा रही है,      प्रशासन में सेवा कर  रही है, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षिका        जैसे तमाम पदों को सुशोभित कर रही हैं।                                     वहीं दूसरी ओर लड़कियां अपने मौलिक अधिकारों से भी वंचित रह जाती है।  यदि परिवार में बेटा और बेटी दोनों है, तो खान - पान, शिक्षा हर चीज़ में भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है।  मेरे हाथ में तो नहीं था न कि मैं एक लड़की हूँ?  मेरा बचपन, क्यों नहीं ढंग से बीता?  क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!  क्यों बेवजह मुझे बात बात पर पीटा?  क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!  मेरे सपने क्यों मजाक लगे तुम्हे?...