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न दिमाग कम था,
न मेहनत कम की।
फिर क्यों न पढ़ पाई,
अम्मा तेरी बिटिया?
जब हमारा समाज ही पुरुष प्रधान हो, जहाँ स्त्री का अपमान हो, उसके सपने का गला घोंटा जाता हो।
उस समाज में कैसे लड़की तरक्की कर सकती है?
संसार में...
एक ओर लड़कियां चांद पर जा रही है,
प्रशासन में सेवा कर रही है, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षिका जैसे तमाम पदों को सुशोभित कर रही हैं।
वहीं दूसरी ओर लड़कियां अपने मौलिक अधिकारों से भी वंचित रह जाती है।
यदि परिवार में बेटा और बेटी दोनों है, तो खान - पान, शिक्षा हर चीज़ में भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है।
मेरे हाथ में तो नहीं था न
कि मैं एक लड़की हूँ?
मेरा बचपन, क्यों नहीं ढंग से बीता?
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
क्यों बेवजह मुझे बात बात पर पीटा?
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
मेरे सपने क्यों मजाक लगे तुम्हे?
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
क्यों भईया जैसी परवरिश नहीं दी मुझे माँ?
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
क्यों मेरे पैदा होने पर रोए थे सब?
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
जब लड़का करे बलात्कार
तब भी इज्जत जाती लड़की की?
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
हे सृष्टि के रचना करने वाले
क्यों भेजा धरती पर मुझे?
पूछ रही हूँ तुझसे यह सवाल
क्योंकि मैं एक लड़की हूँ!
हमारे देश में कई योजनाएँ लाए गए बेटियों के विकास के लिए, संसद द्वारा कानून भी बनाए गए बेटियों के संरक्षण एवं विकास के लिए फिर भी देश में आए दिन बेटियों के साथ बढ़ रहे अपराध हमारे सिस्टम, प्रशासन के गाल पर जोरदार तमाचा है।
हद तो तब हो गई जब आए दिन टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया के माध्यम से हमे यह खबर मिलती है कि देश के नेता, हमारे प्रतिनिधि ही बेटियों की आबरू के साथ खेल रहे है, उनकी गंदी वीडियो बना रहे है।
लेकिन उन दरिंदो पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो रहा है।
आज समाज में कहाँ सुरक्षित है बेटियां?
बड़ी चिंता का विषय है।
कौन बनेगा बेटियों का रक्षक?
बेटियों से मेरा आह्वान...
अबला नहीं सबला है तू।
अन्याय न सहना,
अब चुप न रहना।
तू खुद है, खुद की रक्षक,
न किसी से तू उम्मीद रख।
ऐ बहन तू बन आत्मनिर्भर,
ताकि न हो तुझे किसी बात का डर।
धन्यवाद🙏💕
आपने मेरे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए अपना कीमती समय दिया।
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