भारत में महिला सशक्तिकरण

I raise my voice

not so that I can shout, 

But So that those without a voice

Can be heard... 

We cannot all succeed. 

When half of us are held back. 

मैं अपनी आवाज इसलिए नहीं उठाती हूं ताकि मैं चिल्ला सकूं बल्कि इसलिए कि बिना आवाज वालों को सुना जा सके। हम सभी तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक हम में से आधे को पीछे रखा जाए। 

Woman Empowerment इसमें जो Empowerment शब्द है ना यह एक इंग्लिश word है जिसको हिंदी में "सशक्तिकरण" कहते हैं । 

               Em एक फ्रेंच प्रीफिक्स (prefix) यानी उपसर्ग है जिसका अर्थ है "में" (In) 

इस प्रकार सशक्तिकरण का अर्थ है - शक्ति में होना। 

और महिला सशक्तिकरण का अर्थ है - महिलाओं का सक्षम होना। 

इस शब्द का व्यापक अर्थ है महिलाओं को सक्षम बनाना उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ताकि वह अपनी अस्तित्व की रक्षा कर सके। 

                      Woman empowerment एक ऐसी विचारधारा है जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है उन्हें आत्मनिर्णयन यानी अपने फैसले खुद लेने का अधिकार दिलाता है और महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और भागीदारी सुनिश्चित करने का समर्थन करता है। 

भारत (India) जिसे हम प्रेम से मां कहते हैं, यह देश हमारे माँ है, यह धरती हमारी मां है और 

एक महिला ही मां होती है न?

इसलिए

1. जब तक महिला सशक्त नहीं होगी हमारी मां सशक्त नहीं होगी महिला शक्ति में ही भारतीय शक्ति है। 

2. जब तक महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, पारिवारिक और वैचारिक रूप से उत्थान नहीं होगा तब तक नारी सशक्तिकरण का ढोल पीटना व्यर्थ है भारत की वर्तमान जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है जिसमें 51.6% पुरुष और 48.4% महिलाएं हैं। इस आंकड़े से यह स्पष्ट है कि भारतीय जनसंख्या में हम महिलाओं की भागीदारी लगभग बराबरी की है। 

                       तो हमारे कर्तव्य, हमारे अधिकार भी पुरुषों के समान होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। 

कभी धर्म के नाम पर तो कभी रूढ़िवादी सोच के कारण महिलाओं को दबाया गया कुचला गया उन्हें समान अवसर से वंचित रखा गया। 

हर दुख - दर्द सहकर 

वो मुस्कुराती है, 

पत्थरों की दीवारों को 

औरत ही घर बनाती है।। 

सीता से लेकर द्रौपदी तक को पुरुष प्रधान मानसिकता का शिकार बनना पड़ा। हमारे आदि ग्रंथों में नारी के महत्व को मानते हुए यहां तक बताया गया है कि

 "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:"

अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता  निवास करते हैं। इतनी अच्छी परंपरा और संस्कृति होने के बावजूद हम भारतीय आज सशक्त महिला सशक्त भारत की चिंता करने को मजबूर है।

क्या विडंबना है यह नियति की! 

लैंगिक असमानता से जूझ रही महिला अपने विकास के लिए समान अवसर से वंचित रह जाती है।

इंक्लूसिव डेवलपमेंट (Inclusive development) यानी समावेशी विकास महिलाओं के विकास के बिना असंभव है। 

दो पहिए की गाड़ी का यदि एक भी चक्का खराब हो जाए, पंचर हो जाए तो क्या होता है?

उसी प्रकार महिला और पुरुष रूपी दो पहियों की एक गाड़ी अर्थात भारत महिला रूपी पहिए के बगैर उतना ही असमर्थ  असहाय होगी जितना कि पुरुष रूपी पहिए की गैर मौजूदगी से... 

एक शिक्षित, योग्य, सक्षम महिला अपने कार्यों को अधिक अच्छे से पूरा कर सकती है। अपने घर खर्च का हिसाब रख सकती है। अपने मासिक खर्च का बजट बना सकती है। अपने बच्चों को पढ़ा सकती है। समाज में ढंग से व्यवहार कर सकती है। अपने लिए सही गलत का समझ रख सकती है। अपने निर्णय खुद ले सकती है।

आत्मसम्मान आत्मनिर्भर महिला कभी किसी दूसरे पर निर्भर नहीं होती। वह अपनी ज़रूरतें, अपने सपने खुद पूरी कर सकती है। साथ ही साथ वह घर, परिवार, समाज, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में भी अपनी कामयाबी का परचम लहरा सकती है। 

राष्ट्रीय आय यानी (National Income) नेशनल इनकम, जीडीपी (GDP) , और देश के कल्याण में भागीदारी बन सकती है। 

इंजीनियर, डॉक्टर, पायलट, टीचर, आर्किटेक्ट लेखक, संपादक, न्यूज़ रिपोर्टर जो चाहे वह बन सकती है।

सेना में, आर्मी में जाकर देश की सेवा कर सकती है।

                        मेरी दृष्टि से महिला कमजोर नहीं बल्कि महिला शक्ति है!

दुर्गा है!

काली है!

सरस्वती है! 

सारे गुण होती है महिला में केवल जरूरत है उसे अवसर देने की, सम्मान देने की, सक्षम बनाने की। 

हम महिलाएं देश की मानव संपदा बंद देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। 

नारी को दो इतना सम्मान 

कि बड़े हमारे देश की शान, 

और भारत कहलाए

हमेशा महान!! 

एजुकेशन रेट (Education rate) भारत की जो है उसके मुताबिक महिलाओं की साक्षरता दर 60.6% है और पुरुषों क्या एजुकेशन रेट (education rate) 81.3% है

एक अध्ययन में सामने आया है कि पुरुषों के समान योग्यता और अनुभव (equal experience and capability) इक्वल एक्सपीरियंस एंड कैपेबिलिटी होने के बावजूद भी महिलाओं को 20% कम भुगतान किया जाता है।

 उन्हें पुरुषों से 20% कम payment मिलता है। 

                          लैंगिक असमानता के कारण शिक्षा, भुगतान और पारिवारिक पालन पोषण में भी महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा वंचित रह जाती है । 

घरेलू हिंसा और दहेज की लालच के कारण कई महिलाओं की जिंदगी बर्बाद होती है। और  कईयों को तो मौत के घाट उतार दिया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (IMF) का मानना है कि अगर भारत में महिलाओं को पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाता है और श्रम बल में उनकी भागीदारी पुरुषों के बराबर हो जाए तो भारत का विकास दर डेवलपमेंट रेट (Development rate) 27% तक बढ़ सकती है । 

निष्कर्ष :- महिला सशक्तिकरण से लोकतंत्र मजबूत होगा 

              आर्थिक विकास होगा। लैंगिक समता स्थापित होगी। 

कोमल है कमजोर नहीं हम, 

शक्ति का नाम ही नारी है

जग को जीवन देने वाली, 

मौत भी हमसे हारी है।। 

Drishti IAS से अच्छा लेख/निबंध





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hindi story,hindi poetry,sad hindi story,girls life

अमर नहीं कोई भी